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Thursday, April 24, 2014

Indian masala राज और राधा की चुदाई

Indian masala

 राज और राधा की चुदाई

दोनो अंधेरे में अपने बंगले के बेसमेंट की सीढ़ियाँ उत्तर रहे थे, उसने अपने हाथ मे एक मोमबत्ती पकड़ रखी थी और उसके पीछे राधा चली आ रही थी. “माना तुम्हारी बेहन काफ़ी सुंदर है पर तुम दोनो जुड़वाँ बहने ज़्यादा लगती हो. तुम मुझे भी पसंद आती हो.” जय ने धीरे से कहा.“सच!” वो जोरों से हंस दी, “और में क्यों तुम्हे पसंद आती हूँ?”

“वो जब बिस्तर पर पीठ के बल लेटी होती है तो उसका बदन मे वो आकर्षण नही होता.” उसने थोड़ी हिम्मत के साथ कहा. “ये तुमने कैसे सोच लिया कि मेरे बदन मे वो आकर्षण होगा?” “यही तो हमारी बात चीत का विषय है. अगर मुझे यकीन ना होता तो इतने खुले शब्दों मे थोड़ी तुम्हे कहता. तुम्हारे अंग अंग मे एक नशा भरा है, और मुझे इस बात की भी परवाह नही है अगर तुम मेरी बात सुनकर मुझे थप्पड़ मार दो.”

उसने अपने शरीर मे थोड़ी गर्मी महसूस की और उसकी चूत भी गीली हो गयी उसकी बातें सुनकर. पर दोनो जानते थे कि उपर घर का हर सदस्य मौजूद है. उसने किसी बात की परवाह किए बिना अपना एक हाथ उसकी गर्दन मे डाला और अपने शरीर को पीछे से उसके शरीर के साथ चिपका दिया. उसे विश्वास नही हो रहा था कि इस परिस्थिति मे भी वो मोमबति को गिरने से बचाए हुए था.

“तुम्हे ऐसा नही करना चाहिए. कोई भी यहाँ आ सकता खास तौर पर मेरी बेहन जब वो देखेगी कि उसका पति काफ़ी समय से गायब है. मुझे लगता है कि हमें यही रुक जाना चाहिए.” उसने उसे याद दिलया. “मुझे नही लगता कि ऐसा होगा, कारण एक तो उपर सब अपने काम मे व्यस्त है और दूसरी ख़ास बात में मान नही सकता कि तुम नही चाहती हो कि में यहाँ रहूं.”

उसने अपने होंठ अपने दांतो मे दबा लिए और अपने आपको पीछे की ओर धकेल उसके खड़े लंड का एहसास करने लगी, जो उसके चुतदो की दरारों पर ठोकर मार रहा था. “अगर कोई आ गया तो?” उसने खुद से या सवाल पूछा पर वो ये भी जानती थी कि वो उसके प्रति आकर्षित थी और वो कई बार ये सोचती थी कि काश उसके पति की बजाय वो उसके साथ हो.”“क्या सोच रही हो?” कहकर उसने मोमबत्ती को एक शेल्फ पर लगा दिया. मोमबति की रोशनी मे पूरा बेसमेंट एक सुहानी रोशनी से उसकी तरफ का हिस्सा जगमगा उठा फिर भी अंधेरा था.

फिर उसने महसूस किया कि उसके हाथ उसकी कमर से उपर बढ़ कर उसकी चुचियों को पीछे से मसल रहे थे और उसके होंठ उसकी नंगी गर्दन को चूम रहे थे. “वैसे तो तुम्हारी ड्रेस बिल्कुल तुम्हारे बदन जैसी है पर इन हालत मे ये कुछ ज़्यादा ही है.” उसने उसकी गर्दन को चूमते हुए कहा. उसकी बातें सुनकर वो खुश हो गयी. ये ड्रेस उसे बहोत पसंद थी इसीलिए पहनी थी. उसकी ड्रेस काफ़ी लो कट गले की थी जो उसकी चुचियों के उभार पूरी तरह से दिखाती थी और कमर पर ऐसे चिपक जतती थी कि किसी को पता ही नही चलता कि कोई ड्रेस पहनी है.

उसकी ड्रेस एक दम चॅम्डी के रंग की बनी हुई थी. (वो ये ड्रेस पहन राज को जलाना चाहती थी). उसने ये भी महसूस किया कि उसके ससुर और उसके पिताजी उसके अंगों को कई बार घूर रहे थे.“तुम्हे क्यों ऐसा लगता है कि मेरे कपड़े कुछ ज़्यादा है?’ उसने पूछा. हक़ीक़त तो ये है कि जो भी हम दोनो के बीच होगा वो हम दोनो की रज़ामंदी से होगा.” इतना कहकर उसने अपने हाथ से उसकी स्कर्ट उपर उठा दी.

उसने अपने हाथ उसकी पॅंटी मे फँसा कर उसकी पॅंटी को नीचे खिसका दिया. उसकी इस हरकत से वो चौंक गयी. फिर उसने महसूस किया कि उसका खड़ा लंड उसकी नंगे चुतदो को छू रहा था. उसके शरीर मे काम और इच्छा कि एक लहर सी दौड़ गयी. उसने उसके स्कर्ट के बटन खोल दिए और फिर उसके टॉप के साथ उसकी ब्रा भी उतार दी. उसने थोड़ी सी हिम्मत जुटाई, “प्लीज़ रुक जाओ ना कोई भी आ सकता है.”

उसकी बात को नज़र अंदाज़ कर उसने उसे अपनी तरफ घुमा लिया. उसने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए. राधा ने तो अपने होठ विरोध करने के लिए खोले थे पर उसने पाया कि उसकी जीब उसके होठों को छूती हुई उसके मुँह मे घुस गयी थी. उसका लंड उसकी चूत के मुहाने पर उपर नीचे हो रहा था.  शरीर मे उठती उत्तेजना उसके पावं को कमजोर कर दिया था. उसके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी जब उसके हाथों ने उसकी चूत को भींच लिया.

उसने अपने आपको उसके चुंबन छुड़ाया और अलग किया तो उसने पाया कि वो अपनी पॅंट और शॉर्ट को नीचे खिसका चक्का था. उसका खड़ा लंड तन कर खड़ा था.  उसने राधा का हाथ पकड़ा और अपने लंड पर रख दिया. फिर वो उसके हाथ को अपने लंड पर उपर नीचे खिसकाने लगा. राधा ने महसूस किया कि उसका लंड उसकी मुट्ठी मे और ज़्यादा तनने लगा है. “चिंता मत करो यहाँ कोई नही आएगा.” इतना कहते हुए वो उसके गालों को और गर्दन चूम रहा था और एक हाथ से उसकी चूत को भींच और सहला रहा था.

उसने दूसरे हाथ से उसकी चुचियों को पकड़ लिया, “राधा तुम्हारी चुचियाँ तो बहोत बड़ी है. ये तो तुम्हारी बेहन की चुचियों से भी बड़ी और भारी भारी है.”जब उसने अपने होठ उसके निपल पर रखे तो राधा के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. साथ ही साथ उसने अपनी एक उंगली उसकी चूत मे घुसा दी.

जहाँ उसने मोमबति लगाई थी उसी के नीचे एक टेबल पड़ी थी, “तुम घूम जाओ और झुक जाओ?’ उसने राधा से कहा. “नही.” राधा ने विरोध करते हुए कहा. “इसी तरह तुम अंदर डाल दो.”“में तुम्हे पीछे से चोदना चाहता हूँ.” उसने उसे नीचे झुकते हुए कहा तभी कहीं डोर से कदमो की आवाज़ सुनाई देने लगी. वो घबरा गयी और लड़खड़ाहट मे मोमबत्ती नीचे गिर कर बुझ गयी और बेसमेंट मे पूरा अंधेरा छा गया.

“राधा क्या तुम यहाँ हो?” यक़ीनन ये आवाज़ उसके भाई राज की थी. आज इसी के लिए तो वो ऐसे कपड़े पहन के आई थी. राधा ने कपड़ों की सरहराहट सुनी. वो समझ गयी जय छुपने की जगह ढूँढ रहा है. बेसमेंट के पीछे की ओर एक दरवाज़ा था, अगर वो उसे खोलने मे कामयाब हो गया तो बिना किसी की नज़र मे आए वो यहाँ से जा सकता था.

राधा की आँखे अंधेरे मे देखने की कोशिश कर रही थी. उसने पीछे दरवाज़े पर से अपनी नज़र घुमाई और सीढ़ियों की तरफ देखने लगी, ऐसा करते हुए उसका माथा टेबल की साइड से लगा और वो दर्द मे कराह कर ज़मीन पर गिर पड़ी. “राधा क्या हुआ? तुम ठीक तो हो ना?” राज दौड़ कर सीढ़ियाँ उतरते हुए बोला.

“हां मे ठीक हू.” राधा ने थोड़ी खुश्क आवाज़ मे कहा. उसने अपनी ड्रेस उपर की जिससे उसकी नगन छातियाँ और जंघे ढक सके. अंधेरे मे उसकी आँखे मोमबति और अपनी पॅंटी को खोज रही थी. सबसे पहले उसकी हाथ मोमबति लगी और तभी उसने लाइटर जलने की आवाज़ सुनाई दी.

हल्की सी रोशनी मे उसे अपने भाई का सुन्दर चेहरा नज़र आया और वो उसके सामने खड़ा था. घबरा कर वो बेसमेंट के चारों तरफ देखने लगी. उसने भगवान का शुक्रिया किया जय वहाँ पर नही था, शायद वो खिसक कर पिछले दरवाज़े से चला गया था. “क्या हुआ था तुम्हे और तुम यहाँ बेसमेंट मे क्या कर रही हो?” राज ने राधा को घूरते हुए पूछा. “कुछ नही फिसल गयी थी और मेरे हाथ से मोमबत्ती छूट गयी.” पहले फिर उसने चारों तरफ देखा कि सही मे जय वहाँ तो नही है फिर उसने राज को देखकर मुस्कुरा दिया. “और जहाँ तक तुम्हारे दूसरे सावल का जवाब ये ठीक रहेगा’ कहकर उसने राज का हाथ पकड़ अपनी छातियों पर रख दिया.

“ओह मेरी छोटी बहना, यहाँ मेरे पास आओ.” कहकर राज ज़मीन पर घुटनो के बल बैठ गया और उसे उसके कुल्हों को अपनी बाहों मे ले लिया. “कहीं तुम्हे चोट तो नही लगी?” राज उसकी कमर और कुल्हों पर हाथ फिराने लगा.“नही पहले तो चोट नही लगी थी पर लगता है कि अब मुझे दर्द हो रहा है.” कहकर राधा ने मोमबत्ती फिर टेबल पर लगा दी.

राज हँसने लगा, “तुम चिंता मत करो में तुम्हारा सारा दर्द मिटा दूँगा. पहले मुझे दरवाज़ा तो बंद कर लेने दो कहीं कोई आ गया तो मुसीबत आ जाएगी.” राधा की साँसे तेज हो गयी. उसने राज को सीढ़ियों की ओर जाते देखा फिर दरवाज़ा बंद करने की आवाज़ आई और राज नीचे आने लगा. इससे पहले कि राज राधा के पास पहुँचता, राधा ने अपने सारे कपड़े उत्तर दिए. जब तक वो हल्की रोशनी मे उसका चेहरा देखता वो बिल्कुल नंगी हो गयी थी. इस तरह उसे अपनी खोई हुई पॅंटी का जवाब नही देना पड़ेगा.

“सही मे तुम एक सेक्सी कुतिया हो?” कहकर राज ने उसे अपनी बाहों मे भर लिया और उसके होठों को चूसने लगा और अपनी ज़ुबान उसके मुँह मे डाल दी. जैसे उमीद थी राधा उसकी ज़ुबान को चूसने लगी, राज के मुँह से सिगरेट की बदबू आ रही थी. उसके होठों और ज़ुबान को चूस्ते हुए राज उसके बदन को सहला रहा था और भींच रहा था, “राधा में तुम्हे चोदना चाहता हूँ, मुझसे और रहा नही जाता..”

राज ने अपनी शर्ट खोल दी और पॅंट के बटन खोल रहा था कि, “मुझे अपन लंड दिखाओ?’ राधा बोल पड़ी. राज ने अपने कपड़े खोल उसे अपना लंड दिखाया. हर बार की तरह वो प्यार से उसके लंड को निहारने लगी. वो चुप चाप खड़ी उसके लंड को देखती रही जब तक कि वो नंगा नही हो गया.राधा खड़ी हो गयी, उसे अपनी उभरी और भरी हुई चुचियों पर काफ़ी घमंड था, उसे मालूम था कि उसका भाई उसकी चुचियों को भूकि निगाहों से घुरे जा रहा है, और साथ ही उसकी चूत को भी निहार रहा है.

वो एक कदम आगे बढ़ कर उसे टेबल के सहारे खड़ा कर दिया. उसका गरम और तना हुआ लंड उसके पेट पर ठोकर मार रहा था. उसके लंड की दोनो गोलोइयाँ उसकी चूत को छू रही थी. राज ने उसे बाहों मे भर कर चूमने लगा. राधा की भारी भारी चुचियाँ उसकी छाती मे धँस सी गयी थी. राज ने अपनी जीभ उसके मुँह मे डाल दी और राधा ने महसूस किया कि अब वो उसकी छातियों को कस कस कर मसल रहा है.

राधा से सहन नही हो रहा था, वो घूम कर टेबल पर झुक गयी. पहले जय उसे पीछे से चोदना चाहता था और अब वो राज के लंड को अंदर चाहती थी, “अपना लंड मेरी चूत मे पीछे से डाल दो?” राधा ने राज से कहा. राज ने आगे बढ़ कर अपना लंड उसकी चूत के दरार पर लगा दिया. राधा ने अपने चुतताड पकड़ अपनी चूत को फैलाया और उसका लंड उसकी गीली हुई चूत मे घुसता चला गया. राज राधा पर झुकते हुए उसकी चुचियों को ज़ोर से मसल्ने लगा साथ ही उसके निपल को भी भींच देता था, फिर उसने अपनी जीभ से उसकी कान की लौ पर फिराने लगा.

“आअहह” राधा के मुँह से सिसकारी निकल पड़ी. उसने अपनी टाँगे और फैला दी जिससे वो आराम से राज के धक्कों का साथ दे सके जिसकी वो आदि थी. उसने अपना हाथ नीचे की ओर किया और राज के लंड के दोनो गोलैईयों को पकड़ सहलाने लगी.  राज के बदन का वजन उसे अपने शरीर पर भारी लग रहा था और साथ ही उसकी चुचियाँ टेबल पर धँसी जा रही थी, उसका ध्यान आगे पीछे होते हुए राज के धक्कों का साथ देने मे लगा हुआ था. राधा जब आगे को होती तो राज अपना लंड बाहर खींच लेता पर सुपादे को अंदर रहने देता और जब वो पीछे को होती तो ज़ोर से अपना लंड पूरा अंदर तक पेल देता.

राज कस के धक्के लगा रहा था, राधा उसके हर धक्के का साथ धक्के से दे रही थी, “हीईईईय भ्ाआअगवाआआआं हााआअँ चूओड़ो मुझे और्र्र्र्ररर जोर्र्र्ररर से हााआअँ ऐसे ही ओह” “हााआअँ बहना लीईए अपने भाई कााआ लंड अपनी चूऊत मे, कितना तडपा हूँ तुझे चूऊऊओदे के लिए मेर्रर्र्ररी गुड़ीयाआआ,” राज उत्तेजना मे बड़बड़ा रहा था. “हााआअँ भैया और्र्र्र्ररर ज़ोर सीईईई चोद्द्द्द्द्दू मुझे,” राधा टेबल का कौना और मजबूती से पकड़ सिसकी, “हााआअँ अंदर तक पेल दो ओह हााआअँ और तेज़ी सीईईई चोद दो फद्द्ड़दड़ो अपनी प्यारी बेहन की चूऊऊओत को.” राधा सिसक रही थी.

राज ने अपना हाथ उसकी चूत पर रख दिया और अपनी दो उंगलियाँ अपने लंड के साथ साथ उसकी चूत मे घुसा अंदर बाहर करने लगा.“ओह हााआअँ ऐसे ही मेरााआआअ चूओटने वाअला है.” वो सिसक रही थी, “हााआअँ चोद्द्द्द्द्दो मुझे और ज़ोर सीईईई.”राज एक हाथ से उसके कूल्हे पकड़ ज़ोर के धक्के लगा रहा था. दोनो का शरीर पसीने मे लठ पथ हो गया था. राधा को जिस तरह की चुदाई पसंद थी उसी तरह उसे चोदे जा रहा था. आख़िर राधा की चूत ने पानी छोड़ दिया.

राधा ने महसूस किया कि राज का पानी अभी तक नही छूटा है और वो उसकी चूत मे धक्के लगाए जा रहा है. राज ने उसे अपने पास खींचा और और उसे ज़मीन पर झुका दिया, उसका चेहरा ठीक उसकी पावं के पास हो गया था और अब वो और कस कर धक्के मार रहा था. राधा उसके हर धक्के का साथ आगे पीछे होकर दे रही थी, उसके शरीर मे एक बार फिर उबाल आ रहा था, वो हर धक्के का जवाब उतनी ही ज़ोर से उसे देने लगी.“हां मेरी गडड्डियीयया आईससे ही अपनी गाअँ पीछे कर मेरे लंड को अपनी चूत मे ले लो, ओह हाां में सुबह से ही तुउुउउँहे ऐसे ही चोदना चाआहता था ओह हाआँ.” कहकर राज ज़ोर ज़ोर से राधा को चोद रहा था.

“हीईए भगवाां मेरा फेर छूटने वाला है,” राधा ज़ोर से अपनी गांद को पीछे को करते हुए सिसकी, “हााआअँ डार्लिंग आईससे ही चूऊदो ऑश मेरा चूओत रहा है.”जैसे ही राधा की चूत ने पानी छोड़ा राज ने उसके कंपकपाते हुए बदन को उसके कुल्हों से पकड़ा और अपना लंड उसकी बुर मे अंदर तक धकेल दिया. राज ने अपना लंड बाहर खींचा और सिर्फ़ अपने सूपदे को अंदर रहने दिया और राधा की चूत के पानी का मज़ा अपने लंड पे लेने लगा.

राधा ने महसूस किया कि राज का लंड उसकी चूत मे अभी भी अंदर घुसा हुआ है और उसका लंड अभी तक झाड़ा भी नही है, “क्या बात है तुम अभी तक झाडे भी नही हो?” राधा ने राज से पूछा.“तुम्हारी भाभी प्रिया पहले तो शाम को चुदवाना चाहती थी और फिर पार्टी शुरू होने से पहले फिर उसने चूदवाया, वैसे भी जब मेरा लंड पानी नही छोड़ता और मैं देर तक चुदाई कर सकूँ तो मुझे अच्छा लगता है.” राज ने उसकी चूत मे फिर धक्के मारते हुए कहा.

राज ने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाल लिया. उसने राधा को पकड़ कर अपनी तरफ घुमाया जिससे वो मोमबति की रोशनी मे उसका लंड देख सके. राधा ने देखा कि राज का लंड उसके पानी से लिथड़ा हुआ हल्की रोशनी मे चमक रहा था, आज लंड कुछ ज़्यादा ही मोटा और लंबा लग रहा था, उसके बदन मे एक सिरहन सी दौड़ गयी.

राज नीचे ज़मीन पर लेट गया और राधा को खींच कर अपने उपर कर लिया. दोनो का शरीर पसीने से भरा हुआ हल्की रोशनी मे जगमगा रहा था. राज ने अपनी टाँगे और फैलाते हुए राधा से कहा, “गुड़िया मेरे उपर आ जाओ और अपने हाथों से मेरे लंड को अपनी चूत से सटा दो.”राधा ने अपनी दोनो टाँगे ठीक से अगल बगल की और राज के लंड को अपनी चूत के मुँह से लगा दिया, राज ने उसकी कमर पकड़ उसने नीचे की ओर खींचा और उसका लंड राधा की चूत की दीवारें चीरता हुआ अंदर तक घुस गया.

“ओह अहह” राधा के मुँह से एक पर फिर सिसकारी निकल पड़ी. खुशी और मज़े की उत्तेजना मे वो ज़ोर ज़ोर से उसके लंड पर उछल रही थी. राज भी नीचे से अपने कूल्हे उठा उसके धक्को का साथ दे रहा था. राधा ने महसूस किया कि राज का लंड पहली बार से ज़्यादा गहराई तक उसकी चूत मे जा रहा था. अपनी गांद को कस कर उसके लंड पर दबाए हुए राधा बैठ गयी, फिर एक हाथ से अपनी चुचियाँ मसल्ते हुए बोली, “राज तुम्हारा लंड कितना अच्छा लग रहा है मुझे,” कहकर उसने अपना एक पीछे लिया और राज के लंड की गोलैईयों को सहलाने लगी.

राज ने राधा को थोड़ा नीचे झुकाया और उसकी चुचि को अपने मुँह मे लेकर चूसने लगा. साथ ही साथ वो नीचे से धक्के मार उसे चोद रहा था. राधा उत्तेजना मे उपर को उठती और जब राज के लंड का सिर्फ़ सूपड़ा उसकी चूत मे रह जाता तो ज़ोर से नीचे को आती, वो यही क्रिया बार बार ज़ोर से कर रही थी.

राज उत्तेजना मे बड़बड़ा रहा था, “ओह राआआढ़हाअ हाां चोदूऊ मुझीईई और जोर्र्र्र्र्र्ररर से, ओह मेराा चूओटने वाला है.”सिर्फ़ इतना सुनकर की राज का छूटने वाला है राधा की चूत ने तीसरी बार पानी छोड़ दिया. राज ने भी उसके चुतदो को कसकर पकड़ा और अपने कूल्हे और उपर करते हुए अपने वीर्य की पिचकारी उसकी चूत मे छोड़ते हुए झाड़ रहा था, “लूऊऊओ मेरााआअ प्ाअनी अपनी चूओत मे ऑश में झाआड़.”“हाआाआअँ छोड़ दो अपनााआआ प्ाअनी मेरी चूत मे, भर दो मेरी चूऊत को आआआज,” राधा सिसक रही थी और उसकी चूत पानी पे पानी छोड़े जा रही थी.

बेसमेंट मे उनकी उखड़ी हुई साँसों की आवाज़ गूँज रही थी. दोनो तक कर एक दूसरो को चिपकाए लेटे हुए थे.“चुदाई कभी इतनी भी अच्छी हो सकत है, में नही जानती थी.” कहकर राधा ने अपना चेहरा राज के सीने मे छिपा लिया. राज और राधा दोनो अंजान थे कि उनका जीजा जय बड़ी टंकी के पीछे से उनकी इस भयानक चुदाई को देख रहा था. जय की साँसे भी तेज हो गयी थी और वो दूसरी बार अपने लंड से छूटे पानी को पोंछ रहा था.

जय को मन ही मन गुस्सा आ रहा था कि राज बीच मे आगेया था वरना आज वो राधा को चोद कर अपनी दिल की इच्छा पूरी कर लेता. उसने अपनी पॅंट पहनने की कोशिश नही की थी और राज के आते ही टंकी के पीछे चुप गया था. जय ने जब राज को राधा को चोद्ते देखा तो उसे शक़ हुआ कि कहीं राज उसकी पत्नी (राज की बेहन) सुनीता को भी चोद्ता होगा. राधा उछल उछल कर राज को चोद रही थी तो उसे लगा कि वो राधा नही सुनीता है. दोनो बहनो मे कितनी समानता थी.

जय अपने खड़े लंड को सहलाते हुए उन दोनो की ओर बढ़ने लगा, आज उसने पक्का निस्चय कर लिया था कि वो राधा को चोद के रहेगा.”“इस समय तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” राज ने जय से पूछा. जय ने सोचा था कि उसे देखकर दोनो घबरा जाएँगे, घबडाएँगे नही तो कम से कम शर्मा तो जाएँगे पर ऐसा कुछ नही हुआ. और ये देखकर उसे और आश्चर्य हुआ कि उन दोनो ने अपना नंगा बदन तक ढकने की कोशिश नही की.“में सोच रहा था कि ये सवाल तो मुझे तुम से करना चाहिए?” जय ने धीरे से कहा.

“ये जानते हुए कि आधे घंटे से तुम यहाँ हो और सब देख रहे थे तो एक बेवकूफ़ ही ये सवाल पूछ सकता है.” राज थोड़ा गुस्सा होते हुए बोला. जय थोड़ा और आगे आया, राधा अभी भी अपने भाई राज के लंड को सहलाते हुए उसे घूर रही थी. ऐसा नही था कि वो डर रही थी पर उसके चेहरे पर एक शैतानी मुस्कुराहट थी जिसने जय के लंड को और खड़ा कर दिया था.

“तो मुझे यहाँ देखकर तुम्हे आश्चर्य नही हुआ?” जय ने हंसते हुए पूछा. “आश्चर्य!” राज हमेशा गुस्से मे ही जवाब देता था उसे ये पता था, “हम क्यों आश्चर्य करेंगे किसलिए.”राज के जवाब ने जय को चौंका दिया, “तुम्हे ना हुआ होगा पर मुझे हुआ है, दुनिया कई मर्द कई औरतों को चोद्ते है, पर क्या ये तुम्हारी बेहन नही है.” राज उसकी बात सुनकर ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा और राधा की चुचियाँ मसल्ने लगा.“ये क्या है?” राज ने एक हाथ से अपने लंड को जय को दिखाते हुए पूछा. “ये लंड है में जानता हूँ.” जय ने खीजते हुए कहा.

राज ने अपनी एक उंगली राधा की चूत घुसाते हुए पूछा, “और इसे क्या कहते है?”“ये क्या मज़ाक है, कोई गुप्तांगो का नज़ारा पेश कर रहे हो क्या,” जय झल्लाते हुए बोला. “मेरे प्यारे जीजू इसे चूत कहते है. जब लंड को चूत और चूत को लंड पसंद है तो क्या फरक पड़ता है कि इन दोनो के मालिक भाई बेहन है या कुछ और जो तुम समझो.”

जय थोड़ी देर खामोश रहा और राज को देख रहा था जिसकी दो उंगलिया राधा की चूत मे अंदर बाहर हो रही थी. राधा भी राज के लंड को सहलाते हुए उसकी ओर देख रही थी, “एक बात कहूँ तुमसे.”“बको क्या कहना चाहते हो?” राज ने कहा. “जब तुम इस खुले दरवाज़े से बेसमेंट की सीढ़ियाँ उतर रहे थे उस वक्त मे करीब करीब अपना लंड इस टेबल पे झुकी राधा की चूत मे डाल चुका होता.” जय ने कहा.

राज ने अजीब नज़रों से जय को देख और फिर राधा की ओर देखा जो उसके लंड को मसल रही थी रगड़ रही थी, राधा ने शर्मा कर अपनी नज़रें हटा ली. अचानक राज ज़ोर ज़ोर से हँसने लगा जैसा वो पागल हो गया हो.“इसमे इतना हँसने वाली क्या बात है?” जय गुस्से मे बोला. अब में समझा वो गिरने की आवाज़ कैसी थी,” राज ने कहा, “राधा मुझे नही मालूम था कि तुम अपने जीजाजी से भी चुदवाना चाहती हो? पता नही जब सुनीता को पता चलेगा तो वो क्या सोचेगी.”

“सुनीता को ये सब जानना ज़रूरी नही है.” जब एक कदम और आगे बढ़ते हुए बोला. मोमबत्ती से आती रोशनी मे उसका चमकता लंड अब दोनो को दिखाई दे रहा था. राज ने पहली बार जय के लंड को देखा था. “अरे जय तुम्हारा लंड पूरी तरह ताना और खड़ा हुआ है.” राज थोड़ा मुस्कुराते हुए बोला. राधा ने पॅंट से बाहर झाँकते जय के लंड को देखा जो उसके चेहरे के सामने था. वो मन ही मन राज और जय के लंड की तुलना करने लगी.

राज का लंड काफ़ी लंबा था और जब खड़ा होता था तो उपर की ओर उठ जाता था. वो जय के लंड जितना मोटा नही था पर करीब एक इंच लंबा ज़रूर था. जय का लंड दिखने मे काफ़ी मोटा लग रहा था. “आज सुबह से ही ये मुझे चिड़ा रही थी और उकसा रही थी. में सुबह से इस खड़े लंड को लेकर घूम रहा हूँ.”“तुम भी तो मुझे सुबह से ही छेड़ रहे थे.” राधा ने राज के लंड को और घिसते हुए कहा. “

तो बताओ हमे क्या राज के आने से पहले तुम मुझसे चुदवाने को तय्यार नही थी?” जय ने कहा. “बहुत बहस हो गयी,” राज बीच मे बोला, “राधा सच सच बताओ क्या तुम इससे चुदवाना चाहती हो?”राधा कुछ बोली नही और जय की ओर देखती रही फिर उसने अपनी नज़रें राज की टाँगों के बीच उसके लंड पर गढ़ा दी. “हां ये ज़रूर चुदवाना चाहती है,” जय उत्तेजित होते हुए बोला, “तुम्हारे आने के पहले ये मुझसे कह रही थी कि में खड़ा खड़ा ही अपना लंड इसकी चूत मे पेल दूं.”

“सच!” राज हल्के से मुस्कुराया और अपनी उंगली उसकी चूत से निकाल कर राधा के मुँह की आगे कर दी. राधा ने अपना मुँह खोला और उसकी उंगली को अंदर लेते हुए चूसने लगी. “पूछो इससे इसने कहा था कि नही.” जय उनके और करीब आते हुए बोला, “पर ये जवाब तो तब देगी ना जब तुम अपनी उंगली इसके मुँह से निकलोगे.”सॉरी दोस्त.” राज हंसते हुए बोला, “कोई छिनाल ही अपनी चूत से निकली उंगली और उसपे लगे अपनी चूत के पानी को इस तरह चूसेगी, और राधा को ये पसंद भी है.”

इस से पहले कि जय कुछ कहता राज इस तरह घूम गया कि उसका लंड राधा के मुँह के सामने हो गया. दोनो अब भी सॅट कर लेटे हुए थे, राज ने अपने आपको इस अवस्था मे कर लिया कि उसका लंड राधा के मुँह के ठीक सामने था. राधा  उतनी ही फुर्ती से उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी जितनी फुर्ती से उसने उसकी उंगली मुँह मे ली थी. जय भूकि नज़रों से राधा के फूले गाल और मुँह को देख रहा था जो राज के लंड को ज़ोर ज़ोर से चूस रहा था. “में अब भी इसे चोदना चाहता हूँ.” जय ने अपना लंड पूरा बाहर निकाला और मसल्ने लगा.

“मुझसे मत कहो, इससे पूछो?” राज ने कहा. “पर तुम इसे कुछ जवाब तो देने दो.”राज ने अपने आपको थोडा पीछे किया और उसका लंड उसके मुँह से बाहर आ गया, “क्या कहती हो गुड़िया?”“हां में चुदवाना चाहती हूँ.” राधा चहकी, उसकी चूत एक बार फिर गीली हो रही थी. “तुम्हे तुम्हारा जवाब मिल गया है.” राज ने जय से कहा. जय आगे बढ़ा और विश्वास के साथ राधा के कुल्हों को सहलाने लगा, “में अब भी तुम्हे पीछे से चोदना चाहता हूँ.”

राज तुरंत ज़मीन पर पसर गया और अपनी टाँगे फैला दी, उसने राधा को खींच कर अपने लंड पर झुका दिया जिससे उसकी गांद हवा मे उठ गयी, “मेरे लंड को जोरों से चूस कर खड़ा कर दो और तुम घुटने को बल घोड़ी बन जाओ?” राधा खिसकती हुई अपने भाई की टाँगो के बीच आ गयी. उसका लंड खड़ा छत को घूर रहा था. वो घुटनो के बल हो गयी और अपने शरीर को आधा झुकाते हुए उसके लंड को अपने मुँह मे ले लिया और राज ने अपने हाथ बढ़ा उसकी चुचियों को अपनी मुट्ठी मे भर लिया.

जय उत्तेजना मे भरा हुआ झपट कर राधा के चुतदो पे आ गया. उसने अपना लंड उसकी चूत के मुँह पर लगा धक्का मारा निशाना चूक गया. झल्लाते हुए उसने फिर किया फिर वही हुआ, राज उसे देख रहा था.“आराम से यार ये कहीं भागी नही जा रही है.” राधा ने आख़िर अपना हाथ नीचे करते हुए जय के लंड को पकड़ा और अपनी चूत से लगा दिया. उसने अब अपने दोनो हाथों से चूत को और फैला दिया, जय ने अब धक्का मारा तो उसका लंड राधा की चूत मे घुस गया.

“आअहह” एक ज़ोर की हुंकार भरते हुए जय ने अपना लंड जड़ तक उसकी चूत मे पेल दिया. फिर उसकी पतली कमर को पकड़ कस के धक्के लगाने लगा. राधा भी अपने कूल्हे पीछे कर उसका साथ दे रही थी.जय जब ज़ोर से अपना लंड उसकी चूत मे पेलता तो राधा का मुँह और नीचे को राज के लंड पे जाता और उसका लंड उसके गले तक चला जाता. उसे अपनी साँसे रुकती हुई महसूस होने लगती.

राधा ने अपने आपको इस तरह कर लिया कि अब उसे लंड गले तक लेने मे कोई तकलीफ़ नही हो रही थी. जय ज़ोर से उसे चोद रहा था, उसे अब अपना मुँह भी हिलाने की ज़रूरत नही थी. जय के धक्के ही सब काम कर रहे थे. राधा को दोहरा मज़ा आ रहा था, एक लंड उसके मुँह को चोद रहा था तो दूसरा लंड उसकी चूत को. उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी और वो भी अपनी कमर पीछे कर उसका ज़ोर से साथ देने लगी. अब राधा ने अपनी ज़ुबान हरकत मे लाई. वो अपनी ज़ुबान से उसके लंड को चाट्ती और हो सकता उतना थूक उसके लंड पर गिरा देती. पहले वो सुपादे को चाट्ती फिर उसकी लंबाई को चाटते हुए अपने होन्ट भींच लेती. उसकी इस हरकत से राज के लंड मे उबाल आना शुरू हो गया.

राज ने हाथ बढ़कर उसके बालों को पीछे कर दिया जिससे वो राधा के गुलाबी होटो को अपने लंड पर उपर नीचे होते देख सके, राधा उसकी बेहन ये कर रही है इस सोच ने उसके बदन मे और आग सी भर दी. जय उन दोनो को देख रहा था और धक्के मार रहा था. उसने आँख बंद की और उसे लगा कि उसकी बीवी सुनीता राज के लंड को चूस रही है, इस ख़याल ने उसमे और उत्तेजना भर दी और वो ज़ोर ज़ोर से अपनी साली की चूत को चोदने लगा. राज ने राधा का चेहरा अपने दोनो हाथो मे ले लिया, “गुड़िया अब में तुम्हारे मुँह की चुदाई करूँगा?”

राज ज़ोर ज़ोर से उसके मुँह मे अपना लंड अंदर बाहर करने लगा, राधा उसके हर धक्के पर अपनी जीब से उसके लंड को रगड़ देती. दोनो लंड ने जैसे ताल ताल से मिला रखी थी. एक ही साथ उसकी चूत और मुँह मे घूस्ते और साथ ही बाहर को आते. “आअहह” सिसकते हुए जय अब अपने नाख़ून उसके चुतदो पर गढ़ा रहा था उसे मालूम था कि उसका छूटने वाला है.

राधा थोड़ा सा पीछे को हुई और राज के लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल कर बोली, “ऊहह राज कितना अच्छा लगा रहा है जब तुम मेरे मुँह की चुदाई करते हो, और जय के लंड ने तो मेरी चूत मे आग लगा दी है, हाां जे चोदो और ज़ोर से चोदो मुझे, घुसा दो आआअपँ लंड मेरी चूओत मे फ़ाआद दो इसस्स्ससे हाां और अंदर तक ज़ोर से और ज़ोर से.”राधा ने अपनी एक भारी चुचि अपनी मुट्ठी ली और उसके निपल को इस तरह से करके राज के लंड के छेद पर घिसने लगी. उसके निपल के लंड पर रगड़ने से राज के शरीर मे सिरहन सी दौड़ गयी, “ऑश राआधा कितना अच्छा लग रहा है जब तुम ऐसे करती हूऊओ.”

“तुमने सही कहा था राज ये एक छिनाल कुतिया है, देखो किस तरह दो लंड से मज़ा ले रही है.” जय ज़ोर के धक्के मारते हुए बोला. राधा और ज़ोर से राज के लंड को चूस रही थी, जब वो अपनी ज़ुबान उसकी लंड के छेद पर फिराती तो राज अपने लंड को और अंदर तक पेल देता. तीनो अपनी उत्तेजना की चरम सीमा पर पहुँच चुके थे. रुकना तीनो को मुश्किल लग रहा था. बेसमेंट मे सिर्फ़ चुदाई की आवाज़ आ रही थी. “ओह चूऊऊओदो मुझे ओह मेरााआअ चूऊऊथा.” कहकर राधा ने अपने कूल्हे पीछे किए और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.

थोड़ी ही देर मे राज और जय के लंड ने भी पानी छोड़ दिया. राधा का मुँह राज के वीर्य से भर गया था तो उसकी चूत जय के वीर्य से. जय का वीर्य उसकी चूत के पानी से मिलता हुआ उसकी जाँघो तक बह के आगया था. तीनो निढाल हो तक कर ज़मीन पर लेटे हुए थे. तेज होती साँसे महॉल मे गूँज रही थी. “माज़ा आ गया ना.” राधा धीरे से फुस्फुसाइ, थक ज़रूर गयी हूँ लेकिन मेरा दिल नही भरा.”

जय को अपने कानो पर विश्वास नही हो रहा था. उसकी ये साली जो थोड़ी देर मे कई बार झाड़ चुकी थी और अभी भी उसकी चुदाई की इच्छा बाकी है. काश उसकी बीवी सुनीता भी अपनी बेहन की जैसी होती. सुनीता राधा की जैसी चुदासि नही थी. करीब दस मिनिट सुस्ताने के बाद जय ने पूछा, “तुम दोनो के बीच ये कब से चल रहा है?”“कुछ याद नही कितना वक़्त हो गया.” राज ने बिना झिझकते हुए कहा.

“में कुछ समझा नही.” “हमने इसका 18 वा जनमदिन इसे नंगा करके मनाया था.” राज ने हंसते हुए कहा.थोड़ी देर खामोशी छाई रही, “तुम्हारा मतलब है…में कहना चाहता हू कि क्या तुम….” जय अपनी बात पूरी नही कर पाया. “यार मेरी समझ मे नही आ रहा कि तुम कहना क्या चाहते हो?” राज उसके चेहरे को देखते हुए बोला. “में ये कहना चाहता हूँ क्या सुनीता ने भी तुम दोनो का साथ दिया था.?” जय ने कहा. इस बार पहले से ज़्यादा देर तक खामोशी छाई रही. राधा की निगाह अपने भाई पर टिकी हुई थी, वो इस प्रश्न से घबडा सी गयी थी और चाहती थी कि इसका जवाब उसका बड़ा भाई दे.

हमेशा की तरह राज ने साफ साफ कहा, “इस से कोई फरक पड़ता है जय कि सुनीता ने हमारा साथ दिया था कि नही.”जय सोच मे पड़ गया. राज और राधा की चुदाई देख कर उसे हर समय  यही लगा था कि राधा की जगह उसकी पत्नी सुनीता राज से चुदवा रही है. कितनी समानता थी दोनो बहनो मे. हालाँकि राधा सुनीता से छोटी थी, पर कितना फरक था दोनो के स्वाभाव मे. राधा जितनी उत्तेजित और चुड़दकड़ थी वही सुनीता इतनी गरम नही थी. “मुझे लगता है कि इससे कोई फरक नही पड़ेगा राज” आख़िर जय ने जवाब दिया.

“अच्छा है तुम समझ गये,” राज बोला, “वैसे तुम हमारे परिवार के बारे मे जानकार चौंकोगे. वैसे तुम्हारे सवाल का जवाब ये है कि हां हमने साथ साथ कई बार चुदाई की है. पर जबसे उसकी शादी तुम्हारे साथ हुई है हमने उसके साथ कुछ भी नही किया.”जय को इसी जवाब का इंतेज़ार था, वो समझ गया था कि सुनीता उनके साथ चुदाई कर चुकी है. आज राधा को चोदने के बाद वो सोच रहा था कि अब भी सुनीता इनका साथ क्यों नही देती.“तुम लोगो ने उसे छोड़ क्यों दिया.” पता नही ये सवाल उसके मुँह से कैसे निकल गया. राज और राधा ने कोई जवाब नही दिया सिर्फ़ अपने कपड़े पहनते रहे. थोड़ी देर बाद तीनो बेसेमेंट से बाहर आ गये.









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